
लेखक के बारे में
रघुवीर सहाय
जीवन और पृष्ठभूमि
रघुवीर सहाय बदायूँ के निवासी थे और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदार रहे — उन्होंने जिले में कांग्रेस के नेतृत्व वाले एक के बाद एक आंदोलनों में हिस्सा लिया। यही प्रत्यक्ष भागीदारी थी — केवल ऐतिहासिक शोध नहीं — जिसके कारण १९७२ में ज़िला नागरिक परिषद्, बदायूँ ने जिले के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास लिखने का दायित्व उन्हें सौंपा।
पुस्तक में अपने ही शब्दों में सहाय जी ने लिखा कि उन्होंने पहले यह कार्य किसी अन्य को सौंपने का सुझाव दिया था, क्योंकि वे स्वयं को इस विवरण में शामिल करने में हिचकिचा रहे थे — परंतु परिषद् ने आग्रह किया और उन्होंने यह दायित्व स्वीकार कर लिया। उन्होंने आंदोलन के दौरान समाचार-पत्रों में प्रकाशित अपने लेखों, कांग्रेस व गांधी जी पर प्रकाशित इतिहासों, ज़िला गजेटियर, तथा साथी स्वतंत्रता सेनानियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह पांडुलिपि पूर्ण की, जो १९७४ में प्रकाशित हुई।
पुस्तक के पहले अध्याय में सहाय जी का अपना वर्णन है — १९१६ में विद्यार्थी के रूप में लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में उपस्थित होना, और १९१८ में देहली अधिवेशन में स्वयंसेवक के रूप में भाग लेना। अध्याय १ पढ़ें — भूमिका
परिवार की ओर से एक शब्द
पारिवारिक स्मृति — स्वतंत्र ऐतिहासिक अभिलेख नहीं
यह पुस्तक रघुवीर सहाय के लिए इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह किसी हद तक उनके अपने जीवन का भी अभिलेख थी — बदायूँ में उन्होंने और उनके साथी स्वतंत्रता सेनानियों ने जो कुछ झेला, उसे स्मृति के धुंधलाने से पहले दर्ज करने का एक प्रयास। उनके परिवार ने दशकों से उनकी एकमात्र बची हुई प्रति सहेज कर रखी है, और अब इसे डिजिटल कर रहे हैं ताकि उनका विवरण, और उन्होंने जिन लोगों के बारे में लिखा, वे खो न जाएँ।
प्रकाशन विवरण
शीर्षक: बदायूँ जिले के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास (१९१९–१९४७)। लेखक: रघुवीर सहाय। प्रस्तावना: कमलापति त्रिपाठी। प्रकाशक: ज़िला नागरिक परिषद्, बदायूँ (उत्तर प्रदेश)। वर्ष: १९७४।